राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव में भाग लेने श्रीलंका का दल पहुंचा रायपुर, कलाकारों ने कहा छत्तीसगढ़ घर जैसा

रायपुर। रायपुर के साइंस कालेज मैदान में शुरू हो रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में अपनी कला का प्रदर्शन करने श्रीलंका का 12 सदस्यीय दल आज रायपुर पहुंच गया है। श्रीलंका दल के सदस्यों ने रायपुर पहुंचने पर खुशी जाहिर की और कहा कि यहां आकर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। यहां का मौसम श्रीलंका जैसा ही है। यहां के लोग और श्रीलंका के निवासियों का रंग-रूप, कद-काठी लगभग समान ही है। वेशभूषा भी मिलता-जुलता है। छत्तीसगढ़ के समान ही श्रीलंका में भी धान और चाय का उत्पादन बहुतायत से होता है। यहां पहुंचने पर बहुत अच्छा आवभगत हुआ। श्रीलंका के दल प्रमुख उमा श्रीधरन ने बताया कि उनका निवास स्थान मध्य श्रीलंका में है और उनकी भाषा तमिल है। सत्य साईं कलालयम नाम की उनकी संस्था है। इसी संस्था के 12 कलाकार रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में अपनी कला का प्रदर्शन करने आए है। श्रीलंका में अगस्त में महीने में भगवान बुद्ध के पूजा के अवसर पर विशेष नृत्य किया जाता है। श्रीलंका का राष्ट्रीय त्यौहार पैराहरा है। सुश्री श्रीधरन ने बताया कि श्रीलंका के कलाकारों द्वारा चार प्रकार के नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। जिसमें पॉट डान्स जिसमें गांवों की महिलाएं घड़ा में पानी लेकर पनीहारिन की तरह जाते हुए डान्स करती है। हारर्वेस्टिंग डान्स खेती-किसानी के समय किसानों द्वारा की जाती है। स्वार्ड एण्ड रबान डान्स जुलाई के महीने में विशेष पूजा के समय की जाती है। पीकाक एवं शॉल डान्स श्रीलंका में किए जाने वाला मयूर नृत्य है।

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